“वकत आ गया है, मेरे कवि दोस्त!”-कविता जो आपको सोच में डाल देगी

नवाजुद्दीन सिद्दीकी और रामनिक सिंह की कविता “वकत आ गया है, मेरे कवि दोस्त!” आपको सोच में डाल देगी आखिर कब तक शायर मेहबूब के प्यार और उसकी की खूबसूरती की बातें करेगा ? कब तक प्यार और जुदाई के गीत जाएगा,शराब पे गज़ले और प्यार में धोके को बताएगा..

ये सवाल उठाए हैं रमनीक सिंह ने अपनी कविता के माध्यम से. साथ में नवाज़ुद्दिन सिद्दिकी ने भी उनकी कविता को अपनी आवाज़ दी है…

नवाजुद्दीन सिद्दीकी और रामनिक सिंह की इस कविता ने हम सब और विशेषकर कवि पर सवाल उठाये है..ये कविता हमे ये एहसास दिलाती है

अब वक़्त आ गया है हमे अपनी जिमेदारियों को समझना होगा..

अब और बेहरे मत बनिए और सच को जान कर भी मत हो चुप क्यूंकि अब वक़्त आ गया…

जरूर सुने:

कवि अपनी कलम से कैसे ख्वाब सकता है जब की हमारे देश का किसान अपनी ही फसल की वजह से मर जाता है..

किसी सीवर का काम करते हुए सफाईकर्मी के मर जाने पर भी कैसे कोई मौसम पे कविता लिख सकता है..

इस कविता का सार है की कवि का काम सिर्फ वाह वाह लूटना नहीं बल्कि सामाजिक मुद्दों को उठाना ,उसे लोगो तक अपनी कविता से पहुचाना और उसके लिए जगाना है

 

 

 

supreet kaur

Maverick Soul | Health,Poetry,Fashion Enthusiast and Blogger | Digital Marketing Expert

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